मैं समस्त युवक व युवतियों को यह बताना चाहता हूँ कि हमें सदैव आशा रखनी चाहिये तथा कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। आप सफलता केवल तभी प्राप्त कर सकते हैं जब आप इसके लिए अपना पसीना बहायें तथा पूरी लगन व परिश्रम के साथ कार्य पर जुट जायें। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि भारतीयों का दिमाग किसी ट्यूटमिक, नाॅर्डिक या अंग्रेज से किसी मायने में कम नहीं है। शायद हममें साहस व उस जीत की भावना की कमी है जो कि हमें सफलता दिला सकती है। हमें अपने आप में जीत की भावना को जगाना है, अपनी क्षमता को पहचानना है और लगन के साथ कार्य करना है तभी हम इस विश्व में अपनी सही जगह पर पहचाने जायेंगे। अगर किसी भी प्रकार हम यह भावना पैदा कर लें तब हमें हमारा लक्ष्य मिलना सुनिश्चित है।
आज उमा इलेक्ट्रानिक इन्स्टीट्यूट एक संस्था नहीं, बल्कि देश में फैली बेरोजगारी के विरुद्ध एक संघर्षपूर्ण अभियान का नाम है।
तकनीकी शिक्षा, बदलती हुयी टेक्टोलाॅजी के अनुरूप हो, सस्ती हो और सबके लिए सुलभ हो। महात्मा गाँधी के इस विचार से पे्ररणा लेकर इस संस्था की स्थापना की गई। संस्थापकों ने प्रशिक्षण का एक व्यवहारिक स्तर तय किया, वह यह कि जो छात्र अपनी इच्छा से पढ़ने आया है उसे ट्रनिंग के बाद अपना काम करने योग्य हो जाना चाहिये।
पिछले वर्षों के प्रशिक्षण अनुभव से यह स्पष्ट हो गया है कि व्यवसायिक प्रशिक्षकों द्वारा छात्रों को दी गई प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ही आगे काम आती है। इसलिए प्रशिक्षण व्यवस्था पूरी तरह प्रैक्टिकल सिस्टम पर आधारित रखी गई है। प्रशिक्षक सिस्टम की कार्य प्रणाली ब्लैक बोर्ड पर छात्रों को समझाकर प्रैक्टिकल आरम्भ कर देता है। जिन सिद्धान्तों को नोट करने की आवश्यकता है वे पुस्तक और सेमेस्टर के रूप में संस्था द्वारा प्रकाशित किये गये हैं। छात्र इनसे अपना थ्योरी लिखने का समय बचा सकते हैं। कम थ्योरी वाले कोर्सो के लिए पुस्तक की आवश्यकता नहीं है।
1. शुल्क विवरण में अंकित शुल्कों एवं प्रशिक्षण शुल्क के अतिरिक्त अन्य किसी प्रकार का शुल्क या काशनमनी संस्था नहीं लेती।
2. प्रैक्टिकल के लिए सभी आवश्यक सामान संस्था के नियमानुसार कक्षा में उपलब्ध करायें जायेंगे।
3. प्रवेश लेने के पश्चात प्रवेश शुल्क तथा प्रशिक्षण शुल्क वापस नहीं होगा, परन्तु भविष्य में छात्र चाहे तो शेष शुल्क के साथ पुनः प्रवेश लेकर पढ़ सकता है। पूर्व में जमा प्रशिक्षण शुल्कों की रसीद दिखाने पर उतनी राशि कम देनी होगी।